आज शिक्षक दिवस के अवसर पर जब मेने अपने गुरु श्री पूरण सिंह तोपवाल जी को फ़ोन किया और इनको प्रणाम करने के बाद उनसे अनुरोध किया की आप कुछ लेख लिख कर भेजें तो उन्होंने बड़े उत्साह पूर्वक कहा की "मेरे पास एक कविता है में वो भेज रहा हूँ"
आदरणीय श्री तोपवाल जी उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में गणित के प्रवक्ता हैं, अत्यधिक मृदु भासी सरल स्वाभाव के व्यक्ति हैं, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की लोकहित और जनहित के कार्यों में हमेशा आगे रहते हैं |
तो प्रस्तुत हैं श्री तोपवाल जी की मंत्रमुग्ध कर देने वाली कुछ पंक्तियाँ
है मुझे गर्व मैं शिक्षक हूँ,
भावी भारत का पथदर्शक हूँ।
गूंथ बचपन की सोंधी माटी ,
नया भविष्य मैं गढता हूँ।
है भरा ज्ञान जो बाल-मनों में,
उसे परिष्कृत करता हूँ।
अभिनय तरह - तरह से कर मैं,
निज कर्तव्य निभाता हूँ।
है मुझे गर्व मैं शिक्षक हूँ,
शिक्षा की अलख जगाता हूँ।
साहित्य, संस्कृति, इतिहास,
कला ,
का भी संगम करवाता हूँ।
क्या हैं ये क्यों हैं भला?
निज शिष्यों को बतलाता हूँ।
जीवन का गणित क्या है?
मैं उनको समझाता हूँ।
कर सकें सामना जीवन का,
कुछ जीवन मंत्र सिखाता हूँ।
भावी भारत के भविष्य को,
उज्जवल करना चाहता हूँ।
है मुझे गर्व मैं शिक्षक हूँ
शिक्षा की अलख जगाता हूँ।
![]() |
| श्री पूर्ण सिंह तोपवाल (प्रवक्ता गणित ) G. I.C धोपारधार टेहरी गढ़वाल, उत्तराखंड |


0 Comments